रविवार, 2 दिसंबर 2018

बॉलीवुड का इश्कजादा अर्जुन कपूर


बॉलीवुड का इश्कजादा अर्जुन कपूर
बॉलीवुड का इश्कजादा...जी हां अर्जुन कपूर...एक ऐसे एक्टर जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से काफी कम टाइम में बॉलावुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई..आज बॉलावुड के इस हैंडसम हंक बॉय का बर्थडे हैं..26 जूव 1985 को पैदा हुए अर्जुन आज अपना 33वां बर्थडे सैलीब्रेट कर रहे हैं...इस बार का बर्थडे अर्जुन के लिए बेहद खास है क्योंकि इस बार पापा बोनी कपूर और बहन अंशुला के साथ ही उनकी स्टेप सिस्टर यानी जाह्नवी और खुशी ने भी अपने भाई का बर्थडे सैलीब्रेट किया...इस मौके पर ख़ास बात ये रही कि उनकी बहन जाह्नवी कपूर ने भैया अर्जुन कपूर को बड़े ही इमोशनल अंदाज़ में बर्थडे विश किया.. जाह्नवी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि- ‘‘आप हमारी ताकत हैं, लव यू , हैप्पी बर्थडे अर्जुन भैया’’... इसके साथ ही ने जाह्नवी ने अंशुला और ख़ुशी के साथ अर्जुन कपूर की एक फोटो भी शेयर की...जिसमें इन सभी भाई-बहनों की केमिस्ट्री साफ़ देखी जा सकती है...अर्जुन के अपनी स्टेप सिस्टर्स के साथ रिश्ते अच्छे नहीं थे..जिसकी वजह पापा बोनी का अर्जुन की मां मोना कपूर को छोड़कर एक्ट्रेस श्रीदेवी से शादी करना था...अर्जुन अपनी मां मोना के बेहद करीब थे...मां की मौत के बाद अर्जुन काफी डिप्रेस हो गए थे...हालांकि वक्त के साथ ही अर्जुन ने खुद को संभाला और फिल्मों में बिजी हो गए...वहीं हाल ही में श्रीदेवी की मौत के बाद से दोनों बहनों के साथ अर्जुन के रिश्ते काफी अच्छे हो गए हैं...अर्जुन हर मौके पर पनी बहनों को प्रोटेक्ट करते नजर आते हैं...सबी को बीच अब काफी स्ट्रोंग बॉन्डिंग देखने को मिल मिलती है...एनीवेज ये तो हुई अर्जुन की रियल लाइफ की गपशप..अब बात करते हैं उनकी रील लाइफ की...एक वक्त था जब अर्जुन का डील डोल काफी खराब था...तब सलमान खान ने अर्जुन को फिल्म में आने के लिए कहा और वजन कम करने की सलाह दी...अर्जुन सलमान की बात से खासे इम्प्रेस हुए और कड़ी मेहनत से काफी वेट लूज किया....फिर क्या था  अर्जुन की बॉडी शेप में आ गई साथ ही अर्जुन के लुक में भी काफी बदलाव देखने को मिला...इसके बाद अपने डेंशिंग स्टाइल के साथ अर्जुन ने फिल्म इश्कजादे से बॉलावुड में डेब्यू किया...जिसमें उनके अपोजिट परिणीती चौपड़ा ने लाड रोल प्ले किया था..पहली ही फिल्म में अर्जुन ने शानदार एक्टिंग की..उनके रफ एंड टफ स्टाइल को ऑडियंस ने काफी पसंद किया...इस फिल्म के लिए अर्जुन को फिल्म फेयर के बेस्ट न्यू कमर मेल कैटेगिरी में नोमिनेशन भी मिला...इसके बाद अर्जुन के करियर की गाड़ी चल निकली और उन्होंने एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दी...फिल्म गुंडे में भी उनके भाई गिरी स्टाइल को काफी पसंद किया गया...इस फिल्म  उनके साथ रणबीर सिंह और प्रियंका चोपड़ा ने स्क्रीन शेर की और फिल्म गुंडे बॉक्सऑफिस पर हिट हो गई...अर्जुन ने फिल्म टू स्टेट में एक बार फिर से अपनी एक्टिंग स्किल से ऑडियंस को इम्प्रेस किया...इस फिल्म में आलिया के साथ उनकी कैमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया...ये फिल्म बॉक्सऑफिस पर जबरदस्त हिट रही वहीं फिल्म के गानों को भी बेहद पसंद किया गई...करीना के कपूर के साथ फिल्म की एंड का में अर्जुन एक अलग ही रोल में नजर आए...इस फिल्म में भी अर्जुन ने अच्छी एक्टिंग की...वहीं श्रद्धा कपूर के साथ उनकी फिल्म हाफ गर्लफ्रेंड भी बॉक्सऑफिस पर हिट रही..फिल्म में अर्जुन के बिहारी स्टाइल ने लोगों को काफी इंप्रेंस किया...साथ ही श्रद्धा के साथ उनकी कैमिस्ट्री भी काफी अच्छी नजर आई...इसके साथ ही फिल्म तेबर और ओरंगजेब में अर्जुन ने बेहतरीन एक्सप्रेशन शानदार एक्टिंग से ऑगियंस के साथ ही डारेक्टर्स को भी इंप्रेस किया...फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई लेकिन अर्जुन की एक्टिंग को सभी ने नोटिस किया...वहीं अर्जुन ने चाचा अनिल कपूर के साथ फिल्म मुबारका में स्क्रीन शेयर की... जिसमें चाचा भतीजे की तगड़ी बॉन्डिंग देखने को मिली...अर्जुन के करियर को भले ही ज्यादा वक्त नहीं हुआ है लेकिन ये उनकी एक्टिंग का ही जादू है जो इतने कम वक्त में भी उन्होंने सितारों की नगरी में अपनी एक अलग पहचान बना ली...यही वजह है कि अर्जुन के पास फिल्मों की लाइन लगी हुई है...उनकी अपकमिंग फिल्मों की बात करें तो अर्जुन जल्द ही फिल्म संदीप और पिंकी फरार, नमस्ते इंग्लैंड, और पानीपत जैसी बड़ी फिल्मों में नडर आने वाले हैं...हमारी तरफ से बॉलावुड के इस इश्कजादे को हैप्पी बर्थडे।

हिन्दी सिनेमा की सरोज


हिन्दी सिनेमा की सरोज
जितने फेमस ये गाने है उतना ही शानदार इन गानों पर किया गया डांस है...और इन गानों में हिरोइन को थिरकाने वाली हैं बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान...जिन्होंनेअपने  कॅरियर में माधुरी दीक्षित से लेकर ऐश्वर्या राय तक लगभग सभी बड़ी अभिनेत्रियों को अपने इशारों पर नचाया...कथक से लेकर मणिपुरी तक सभी नृत्य शैलियों में पारंगत सरोज खान को बॉलिवुड में सभी मास्टर जी के नाम से पुकारते हैं.... सरोज खान का जन्म 22 नवंबर, 1948 को हुआ था....करीब 200 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली सरोज खान का असली नाम निर्मला साधु सिंह हैं...बचपन से ही सरोज ने कफी दिक्कतों का सामना किया... 3 साल की उम्र में सरोज ने बाल कलाकार के रूप में पहली फिल्म नजराना की...सरोज खान ने महज 13 साल की उमंर में स दौर के फैमस डांसर बी. सोहनलाल से शादी कर ली...ये शादी सफल नहीं रही...और उनकी दूसरी शादी सरदार रोशन खान से हुई...दोनों की एक बेटी सुकैना खान है जो मां की तरह ही विदेश में डांस एकेडमी चलाती है.. सिंगल कोरियोग्राफर के तौर पर सरोज खान की पहली निगाहें थी...इस फिल्म में सरोज पहली बार सोलो कोरियोग्राफी की थी साथ ही बैक ग्राउंड डांस भी थीं...इसके बाद नका सिलसिला चल निकला...लेकिन साल 1983 में प्रदर्शित हुई फिल्म हीरो उनके लिए एक बड़ा ब्रेक साबित हुई....फिल्म नगीना में श्री देवी ने मैं तेरी दुश्मन गाने पर जो डांस किया था, वो सरोज खान ने ही कोरियोग्राफ किया था...इस गाने से सरोज खान की प्रतिभा को तारीफें  मिलने लगी....इसके बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लग गई...अपने दौर की सभी मशहूर और बड़ी एक्ट्रेस को सरोज ने डांस सिखाया... माधुरी की हिट फिल्म तेजाब के गाने एक दो तीन को सरोज ने ही कोरियो ग्राफ किया...ये वही गाना है जिससे मोहिनी बनी माधुरी को पहचान मिली...इसके बाद सरोज ओर माधुरी की जोड़ी ने एक से बढ़कर एक सुपर हिट गाने दिए..फिल्म सैलाब का गाना हमको ज कल है गाने को सरोज ने बंहतरीन ढंग से कोरियोग्राफ किया तो वहीं चोली के पीछे में भी इस जोड़ी का जादू चला...फिल्म मअंजाम में भी दोनों ने सुपरहिट डांस नंबर दिया...माधुरी और सोरज की कैमिस्ट्री काफी शादनदार है.. श्रीदेवी के लिए भी सरोज ने कई हिट गानों को कोरियोग्राफ किया फिल्म मिस्टर इंडिया, चालबाज, , चांदनी में दोनों ने शानदार काम किया और सरोज के इशारों पर डांस करती श्रीदेवी का हर कोई दीवाना हो गया... फिल्म हम दिल चुके सनम और देवदास में भी सरोज का डांस का जलवा देखने को मिला...तो वहीं फिल्म दिलवाले दुल्हनिया में भी सरोज ने शानदार कोरियो ग्राफी की... बात अगर सरोज खान को मिले अवॉर्ड की करें तो उन्हें 8 बार फिल्म फेयर और तीन बार नेशनल अवॉर्ड के साथ ही फिल्म लगान के लिए  अमेरिकन आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा गया... सरोज को फिल्म तेजाब के के लिए फिल्म फेयर बेस्ट कोरियोग्राफर का अवॉर्ड मिला, इसके बाद फिल्म गुरू के गाने बरसो रे मेघा के लिए फिल्म फेयर अवार्ड मिला, वहीं फिल्म सैलाब के गाने हमको आज कल है के लिए एक बार फिल्म उन्हें अवराड् से नवाजा गया...खलनायक के पॉपुलर सॉन्ग चोली के पीछे में माधुरी और सोरज  की जोड़ी ने सबी को थिरकने पर मजबूर कर दिया और सरोज ने एक और फिल्म फेयर अवॉरड अपने नाम कर लिया...हम दिल चुके सनम के निबुंड़ा गाने के लिए सरोज ने फिर अवॉर्ड जीता. देवदास के गाने डोला रे डोला के लिए सरोज को फिल्म फेयर के साथ नेशनल अवॉर्ड भी मिला, तो वहीं जव बी मेट के गाने ये इश्क हाय के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया..तचालबाज के गाने ये लड़की कहगा से आई है कि लिए भी सोरज को अवॉर्ड से नवाजा गया तो...वहीं फिल्म बेटा के हॉट एंड सेक्सी गाने धक धक करने लगा के लिए सरोज ने अवॉर्ड अपने नाम किया.. फिल्मों में के अलावा सरोज खान कई रियलिटी शो में बतौर जज की भूमिका अदा कर चुकीं है...इसके साथ ही उनका डांस शो भी बेहद पॉपुलर हुआ जिसमें वो डांस सिखाती थीं...आज भी फिल्म इंडस्ट्री में सरोज खान का जलवा कायम है...

संगीतकार प्यारेलाल


संगीतकार प्यारेलाल

हिन्दी सिनेमा के इतिहास में जब भी सफल संगीतकारों की चर्चा चलती है तो वहां लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता हैलक्ष्मीकांत को प्यारेलाल का साथ मिला तो दोनों ने संगीत की दुनिया में अपना परचम लहरा दिया.. और आज इन्ही जोड़ी में से एक प्यारे लाल का जन्म दिन है.. आज ही के दिन यानी की 3 सितम्बर 1940 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्यारेलाल का जन्म हुआ था... प्यारेलाल का बचपन बेहद संघर्ष भरा रहा.. उनकी माँ का देहांत छोटी उम्र में ही हो गया था.. उनके पिता 'पंडित रामप्रसाद जी' ट्रम्पेट बजाते थे और चाहते थे कि प्यारेलाल वायलिन सीखें... एक बार उनके पिता जी उन्हें लता मंगेशकर के घर लेकर गए.. लता जी प्यारे के वायलिन बजाने से इतनी खुश हुईं कि लता मंगेशकर ने प्यारेलाल को 500 रुपए इनाम में दिए जो उस ज़माने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी.. मेहनत के दम पर प्यारे लाल को मुंबई के 'रंजीत स्टूडियो' के ऑर्केस्ट्रा में नौकरी मिल गई जहाँ उन्हें 85 रुपए मासिक वेतन मिलता था.. प्यारे लाल उन्ही दिनों में एक रात्रि स्कूल में सातवें ग्रेड की पढ़ाई के लिए दाख़िला लिया पर 3 रुपये की मासिक फीस उठा पाने की असमर्थता के चलते प्यारे लाल को स्कूल छोड़ना पड़ा.. मुश्किल हालातों ने भी उनके हौसले कम नहीं किए.. अमर अकबर एंथनी फिल्म का मशहूर गाना माय नेम इस एंथनी गोंजाल्विसप्यारेलाल द्वारा अपने गुरु को दी गयी एक श्रद्धांजलि माना जाता है..  बारह साल की उम्र तक पहुँचने पर, उनके घर की आर्थिक हालात ख़राब रहने के चलते उन्हें मजबूरन स्टूडियो में काम करना पड़ा.. प्यारेलाल की मुलाकात लक्ष्मीकांत से दस साल की उम्र में, मंगेशकर परिवार द्वारा चलायी जा रही बच्चों की अकादमी सुरील कला केंद्र में हुई... समान उम्र और आर्थिक स्थिति के चलते लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल अच्छे दोस्त बन गये... लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने साथ मिलकर पहली बार 1963 में आई फिल्म पारसमणि को अपने संगीत से सजाया, जिसके सभी गाने बहुत लोकप्रिय हुए... (गाना लगाएं हँसता हुआ नूरानी चेहरा  और वो जब याद आये’ ) लता मंगेशकर और मोहमद रफ़ी जैसे बड़े गायकों ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ ही अपने अधिक्तर गाने गाये.. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया... उन्हें दोस्ती, मिलन, जीने की राह, अमर अकबर एंथनी, सत्यम शिवम सुंदरम, सरगम और कर्ज़ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरुस्कार मिला.. कहा जाता है कि प्यारेलाल से अच्छा म्यूज़िक अरेंजर फ़िल्म इंडस्ट्री में हुआ ही नहीं...


दिलों को दिवाना बनाने वाली सुनिधि चौहान


दिलों को दिवाना बनाने वाली सुनिधि चौहान
मन सात समुंदर डोल गया ,जो तू आंखों से बोल गया सांग ने जहां पैर थिरकने पर मजबूर कर दिया वहीं मेरे हाथ, में तेरा हाथ हो सारी जन्नतें मेरे साथ हो सांग से करोड़ो दिलों को दिवाना बनाने वाली सुनिधि चौहान आज किसी परिचय मोहताज नहीं....उन्होंने ने एक से बढ़ कर एक सुपरहिट गाने दिये हैं...सुनिधि बतौर प्लेबैक सिंगर न सिर्फ बॉलीवुड़ बल्कि मराठी,कन्नड़ ,तेलुगु,पंजाबी फिल्मों के गानों को भी अपनी आवाज दी...सुनिधि महज 4 वर्ष की थी जब उनके करियर की शुरूआत हुई.. लेकिन नन्ही सुनिधि की जिंदगी तब बदली जब टीवी एंकर तब्बसुम ने उनकी गायिकी को देखा, और सुनिधि के माता-पिता को मुंबई आने के लिए  कहा.... इसके बाद मुम्बई आकर सुनिधि ने रियलिटी शों 'मेरी आवाज सुनों' में पार्टिसिपेट किया..1999 में आई फिल्म मस्त का रुकी रुकी सी जिन्दगी और उसके टाइटल ट्रैक ने सुनिधि को इन्डस्ट्री में पहचान दिलाना शुरु कर दिया...सुनिधि ने ये शो जीता और साथ ही लता मंगेशकर की ट्रॉफी भी जीती...सुनिधि का जन्म दिल्ली में हुआ और वो अपनी पढ़ाई के बारे में बताती हैं कि उनका पढ़ाई में बिल्कुल मन नही लगता था वो बस इतना पढ़ती थी जिससे एग्जाम में पास हो जायें ....उनके पिता एक गुजराती गायक हैं.. और सुनिधि उन्हे ही अपनी प्रेरणा मानती हैं....इसमें कोई शक नहीं कि सुनिधि जितनी अच्छी सिंगर है उनकी पर्सनालिटी भी उतनी आकर्षक है... वो फैशनिस्टा आइकॉन भी रह चुकी हैं उन्होंने 2013 में एशिया की टॉप 50 सेक्सियस्ट लेडीज में भी अपनी जगह बनाई... सुनिधि का पहला कॉनसर्ट जागरण में गा कर हुआ था....आपको बता दे कि सुनिधि ने अपना पहला इंटरनेशनल शो अमिताभ बच्चन ,अनुपम खेर के साथ किया उस वक्त सुनिधि बहुत छोटी थी उन्होंने मोरनी बागा में नाचे आधी रात को सांग गाय था और अमिताभ जी ने उनकी बहुत तारीफ की......ये  बहुत कम ही लोग जानते हैं सुनिधि की पहली शादी सिर्फ 18 साल की उम्र में कोरियोग्राफर बॉबी खान के साथ 2002 में हुई थी लेकिन वो सिर्फ 1 साल तक ही चल पाई, और 2003 में उनका तलाक हो गया..करीब 9 साल बाद 24 अप्रैल 2012 को उन्होने म्यूजिक कम्पोजर हितेश सोनिक से की..और हाल ही में जनवरी में उन्होने एक बेटे को जन्म दिया...सुनिधि का मानना है कि इन्डस्ट्री में इन दिनों सांग्स को लेकर बहुत कॉम्पटीशन है, एक फिल्म के सारे गाने अलग अलग सिंगर से गवाए जाते है ऐसे में वो अपने आपको खुशनसीब मानती है कि चमेली और कैश मूवी के साऱे गाने उन्ही की झोली में आए.........परिनिता का कैसी पहेली जिन्दगानी, मुझसे शादी करोगी, बीड़ी जलइले, मन सात समन्दर डोल गया, भागे रे मन कहीं. क्रेजी किया रे, मेरे संग तो चल, सजना जी वारी वारी, यही होता प्यार है क्या, लकी ब्वाय, रेस सांसो की, देसी गर्ल, देखो न नशे में, डास पे चांस. जैसे गानों ने उन्हे उन्हे एक ऐसी पहचान दी है जिसके सपने हर कोई देखता है आज सुनिधि न सिर्फ गा रही है बल्कि अपनी मैरिड लाइफ भी जमकर इन्ज्वाय कर रही है...सूर्या समाचार की तरफ से सुनिधि के संहर्ष को हमारा सलाम..

आवाज के जादूगर मन्ना डे

आवाज के जादूगर मन्ना डे
यादगार गानों को अपनी आवाज से सजाने वाले फनकार प्रबोध चंद्र डे....जिन्हें हम सभी मन्ना डे के नाम से जानते हैं...जिनकी आवाज के दीवाने ना सिर्फ ऑडियंस थी बल्कि उसमें मोहम्मद रफी का नाम भी शामिल था...  मोहम्मद रफी कहा करते थे, "सारी दुनिया मेरे गाने सुनती है, मैं तो सिर्फ मन्ना डे के गाने सुनता हूं... मन्ना डे एक नाम ही नहीं ये वो याद है जो सदा सबके साथ रहेगी...हिन्दी के साथ-साथ मन्ना डे ने बंगाली में भी कई गाने गाए जो काफी सुपरहिट हुए...मन्ना डे ने लगभग 4,000 से ज्यादा गाने गाए हैं और हर एक गाना अपने आप में बेहद खूबसूरत था...फिल्म 'श्री 420' का गाना 'ये रात भीगी-भीगी' मन्ना डे और लता मंगेशकर ने गाया था...आज भी लोग इस गाने को पसंद करते हैं वहीं इसी फिल्म के दसरे गाने भी बेहद हिट हुए...फिल्म पड़ोसन का 'एक चतुर नार बड़ी होशियार' गाने को मन्ना​ डे ने किशोर कुमार और महमूद के साथ गाया था..और ये गाना बॉलीवुड के संगीत इतिहास का अमर गाना बन गयाहै...इसके साथ ही उन्होंने फिलम बॉबी में ना चाहू सोना चांदी जैसे हिट गीत को अपनी आवाज दी...वक्त फिल्म का सदाबहार गीत  ए मेरी जोहरा जबी को भला हम कैसे भूल सकते हैं...मन्ना डे की आवाज में स,जा ये गाना एक लीजेंड़्री सॉन्ग बन गया...मन्ना डे अपने करियर में हर मूड के गाने गाए...मस्ती भरे भी और इमोशनल बी...हर गीत में उनका अंदाज बेहद खास रहा...मनना डे राजेश खन्ना के बड़े फैन थे...उन्होंने राझेस खन्ना के लिए भी गाने गाए जो काफी हिट रहे....मन्ना डे के सभी गाने दिल पर एक छाप छोड़ते हैं....'यशोमती मैया से बोले नंदलाला', 'तू प्यार का सागर है तेरी एक बूंद के प्यासे हम', ''यह रात भीगी-भीगी', 'यारी है ईमान मेरा',', 'नदिया चले चले रे धारा' चलत मुसाफिर मोह लियो रे, दिल का हाल सुने दिलवाला जैसे गाने आज भी शिद्दत से सुने और पसंद किए जाकते हैं...मन्ना डे को अपने बेहतरीन योगदान के लिए साल 1971 में पद्म श्री, साल 2005 में पद्म भूषण और साल 2007 में दादा फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था....24 अक्टूबर 2013 को मन्ना डे को दिल का दौरे पड़ने से निधन हो गया था...लेकिन आज भी अपने गानों के जरिए हमारे दिलों में जिंदा है।

मखमली आवाज की मल्लिका अनुराधा पौडवाल


मखमली आवाज की मल्लिका अनुराधा पौडवाल
इन सदा बहार गानों को अपनी मखमली आवाज से सजाने वाली अनुराधा पौडवाल...जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं...उनकी आवाज ही उनकी पहचान है...80 और 90 के दशक में अपने कई यादगार गानों से लाखों दिलों को जीतने वाली अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्तूबर को हुआ...अनुराधा पौडवाल ने हिंदी फिल्मों में कई यादगार गाने गाए...जिव्हें ना सिर्फ पसंद किया गया बल्किन वो गाने आज बी सदाबहार माने जाते हैं...बॉलीवुड में एक दौर ऐसा था जब हर दूसरी फिल्म में गायिका अनुराधा पौडवाल के गाने होते थे...उनकी आवाज का जादू ऐसा है कि आज भी लोग अनुराधा की आवाज के दीवाने हैं...अनुराधा पौडवाल ने अपना करियर 80 के दशक में शुरू किया था और धीरे-धीरे अपनी धाक जमा दी... उस वक्त लता मंगेशकर, आशा भोसले और अल्का याग्निक पहले से ही इंडस्ट्री में टॉप की गायिकाओं में शामिल थीं....ऐसे में अनुराधा पौडवाल के लिए करियर की शुरुआत करना इतना भी आसान नहीं था...टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार को अनुराधा की खोज माना जाता था....कहा जाता है कि गुलशन कुमार उन्हें दूसरी लता मंगेशकर बनाना चाहते थे...साल 1973 फिल्म अभिमान से अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर की शुरुआत की...लेकिन उन्हें पहचान मिली फिल्म कालीचरन से... इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा....उस दौर के सभी बड़े संगीतकारों व के साथ अनुराधा पौडवाल ने काम किया...और सभी के साथ हिट गाने दिए...गुलशन कुमार ने अनुराधा के टैलेंट को पहचाना और उन्हें एक के बाद एक कई गाने दिए...90 के दशक में अनुराधा पौडवाल एक बड़ा नाम बन चुकी थीं... उन्हें 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं' और 'बेटा' जैसी फिल्मों के लिए लगातार तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड दिए गए...अनुराधा की गायिकी का जादू ऐसा छाया कि संगीतकार ओपी नैयर ने भी कह दिया था कि लता का दौर अब खत्म हो चुका है...अपने दौर में अनुराधा ने हर मिजाज हर मूड के गानों को आवाज दी...जो हर हिरोइन पर बिल्कुल फिट बैठती थी...फिर चाहे वो सेड सॉन्ग हो या लव सॉन्ग या फिर हो तम्मा तम्मा जैसे डांस नंबर नंबर...हर एक गाना शानदार रहा और सुनने वालों को पंसद आया...करियर के टॉप अचानक ही अनुराधा ने ऐलान किया कि अब वो केवल टी-सीरीज के लिए ही गाना गाएंगी...अनुराधा पौडवाल के इस फैसले ने उनके करियर में ठहराव ला दिया...इसके बाद वो फिल्मों से गायब हो गई और भजन आरती गाना शुरू कर दिया...फिल्म फेयर और  पद्मश्री जैसे अवॉर्ड से नवाजी जा चुकी सुरो की मलिका अनुराधा पोडवाल भले ही काफी टाइम से लाइमलाइट से दूर हैं....लेकिन उनकी आवाज की खुमारी उनके गाने हमेशा सुनने वालों के दिलों में बसते हैं।

हरदिल अजिज एस डी बर्मन


हरदिल अजिज एस डी बर्मन
हिंदी और बांग्ला फिल्मों में अपनी खास पहचान रखने वाले सचिन देव बर्मन ऐसे संगीतकार थे जिनके गीतों में लोकधुनों, शास्त्रीय और रवीन्द्र संगीत का स्पर्श था...वहीं वेस्टर्न म्यूज़िक का भी शानदार कॉम्बीनेशन था...सचिन देव बर्मन का जन्म 1 अक्टूबर 1906 में हुआ था....प्यार से लोग उन्हें एस डी बर्मन बुलाते थे...बर्मन साहब ने अस्सी से भी ज़्यादा फ़िल्मों में संगीत दिया था...चुपके-चुपके का मशहूर रोमांटिक गाना, ‘अब के सजन सावन में’, एसडी बर्मन ने 31 अक्टूबर 1975 को इस दुनिया को अलविदा कहने से कुछ समय पहले ही बनाया था... एसडी बर्मन एक ऐसे विरले संगीतकार थे जो अपने आखिरी वक्त तक न सिर्फ काम करते रहे बल्कि दिल से युवा भी रहे... इसी तरह अभिमान का हिट गीत, ‘मीत ना मिला रे मन काबनाते वक़्त बर्मन साहब की उम्र 67 साल थी...1971 में जब आरडी बर्मन रैना बीती जाएके साथ सफलता की सीढियां चढ़ रहे थे, तो इसी साल एसडी बर्मन मेघा छाये आधी रातजैसे गीत की रचना कर रहे थे... एसडी बर्मन की म्यूज़िकल जर्नी की शुरुआत फिल्म बाज़ी से की जानी चाहिए... हालांकि इसके पहले भी वे सफल संगीत की रचना कर चुके थे...लेकिन बाज़ी में गीता दत्त का गाया हुआ, ‘तदबीर से बिगड़ी हुयी तक़दीरऔर सुनो गज़र क्या गाएने न सिर्फ एसडी बर्मन को ऊंचाइयां दीं बल्कि गीता दत्त को भी एक नयी और मॉर्डनगायिका रूप में पहचान दिलाई... वहीं लता मंगेशकर के साथ आया गाना झन झन झन झन पायल बाजेखूब चर्चित हुआ...1955 में उन्होंने किशोर कुमार से जीवन के सफ़र में राहीगवाया तो इसी फिल्म में हेमंतकुमार और गीता दत्त से युगल गीत दिल की उमंगें हैं जवांगवाया...इसी साल आई फिल्म देवदास में उन्होंने तलत महमूद से मितवा लागी रे ये कैसीगाने को आवाज़ दिलवाई... फिल्म प्यासा में ओपी नैय्यर और एसडी बर्मन की जोड़ी ने शानदार संगीत दिया...वही सुजाता में अपने संगीत से एक अछूत कन्या के दर्द को आवाज़ दी...1960 में आई कागज़ के फूल में वक़्त ने किया क्या हंसी सितमऔर देखी ज़माने की यारीजैसे गीतों को अपना संगीत दिया...लता मंगेशकर और बर्मन दा की जोड़ी बेमिसाल रही...फिल्म बंदिनी में दोनों ने कमाल कर दिया...मोरा गोरा अंग लै लेऔर जोगी जब से तू आया मेरे द्वारजैसे गीत हर जुबान पर छा गए... इसी फिल्म में बर्मन दा का खुद का गाया मोरे साजन हैं उस पारभी था... एस डी बर्मन औऱ देवआनंद का साथ भी खूब रहा...फिल्म गाइड तक बर्मन दा देव आनंनद की 12 फिल्मों में म्यूज़िक दे चुके थे...और फिल्म गाइड के गाने सुपर हिट रहे...इसके बाद कुछ दिन वो संगीत से दूर रहे और जल्द ही तलाश ,गैम्बलर और शर्मीली के संगीत के साथ बर्मन दा फिर खूंटा गाड़ चुके थे...इसके बाद 1973 में आई अभिमान के सभी सात गाने सुपर हिट हुए...मीत ना मिला रे मन कासे लेकर पिया बिना पिया बिनातक इसमें संगीत के सभी रंग थे...इसके साथ ही उन्हें 20 साल बाद फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला... 1975 में फिल्म मिली के एक गाने की रिहर्सल चल रही थी... इसी दौरान एसडी बर्मन की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई जिसके बाद वे कोमा में चले गए और फिर कभी होश में नहीं लौटे.... यह गाना था - बड़ी सूनी-सूनी है जिंदगी ये जिंदगी’.... किशोर कुमार के गाए इस गीत में आज भी संगीत प्रेमी बर्मन दा के बिछड़ने का दर्द महसूस कर सकते हैं...